आंसुओं को धार दो मेरे हुजुर, गम को अपने मार दो मेरे हुजुर. *** काटो गम की रात तुम चुपचाप से, मिलते रहना तुम भी अपने आपसे, आयेंगे अपने अच्छे दिन भी जरुर. आंसुओं को धार दो मेरे हुजुर.. *** राह मुश्किल हो मगर चलना तो है, ख्वाब टूटेंगे मगर पलना तो है, धुंध में लगती है मंजिल भी दूर. आंसुओं को धार दो मेरे हुजुर.. *** क्यूँ भला मुझको मिली ऐसी सजा? दिन थे बहारों के मगर आई खिजा, कोई बतलाये मुझे मेरा कसूर. आंसुओं को धार दो मेरे हुजुर..
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