
1-
दिल और
तमन्ना जुदा
बेबसी
2-
दिलजले
ये समय कि
मार थी
3-
मज़हबी
बंटवारा
चाल है
4-
कर गयी
पार सरहद
इक हवा
5-
औकात
मत दिखाना
आँसुओं
--गोपाल के.

1-
चलन में
भ्रष्टाचार
आजकल
2-
कांपते
बूढ़े हाथ
लाचार
3-
छुपे हुए
कुछ लुटेरे
वर्दी में
4-
हताशा
बोलती है
आँख से
5-
समय कि
ये है मांग
बदलाव
--गोपाल के.
1-
छलावा
अन्धविश्वास
चमत्कार
2-
मदहोश
सोया हुआ
आक्रोश
3-
आजकल
मिलता नहीं
ज़माना
4-
देर तक
तकता रहा
भिखारी
5-
माल में
मुखौटों से
चेहरे
--गोपाल के.

1-
हाथ की
बदली किस्मत
हाथ ने
2 -
साइकिल,
हाथी, हाथ
गिराओ
3-
तू बता
कैसा रहा ?
हे सखी !
4-
दीवार
खड़ी है अब
दिलों में
5-
सफलता
मिलेगी तो
विश्वास से
--गोपाल के.

1-
बेराह
चलता रहा
मुसाफिर
2 -
दुःख हरो
विनती सुनो
रामजी
3-
कन्हैया
माखनचोर
दुःख चुरा
4-
नवरात्री
माँ अम्बे की
वंदना
5-
खामोश
जल के मरा
बेवफा
--गोपाल के.

1-
दिल कई
लेकिन जज्बात
एक मिले
2-
अब दुश्मन
जो थे कभी
हमसफ़र
3-
पटरियां
मिलती नहीं
रेल की
4-
मजबूर
बेबस, दुखी
मजदूर
5-
भोर तक
थी कालिमा
रात की.
--गोपाल के.
हे कृष्ण कन्हैया
मुरली बजैया
सुन रे माखनचोर
इस धरती का पाप मिटाने
फिर आजा रे रणछोड़
पतित पावनी गंगा मैली
यमुना करे पुकार
आ जा फिर यमुना के तीरे
कर सबका उद्धार
गीता का ज्ञान दिया तुमने
नारी को मान दिया तुमने
बचपन के सखा सुदामा को
क्या-क्या ना दान दिया तुमने
कई द्रौपदी हैं आज यहाँ
कई राधा हैं कई भामा हैं
हमको भी गले लगा ले मोहन
हम भी तेरे सुदामा हैं
डूब रहे हैं बीच भंवर में
आकर के उद्धार करो
बहुत बढ़ गए पापी जग में
अब आकर संहार करो..!!
--गोपाल के.
स्याह रातों के अंधेरों में
भटकती आत्मा की तरह
ज़िंदगी मेरी
जाने कहाँ
किस दिशा में
लिए जा रही है,
ना कोई मंजिल
ना साथी
और ना हमसफ़र कोई..
साथ है तो बस
तन्हाई मेरी
गिरता हूँ
फिसलता हूँ मैं
खाता हूँ ठोकरें
फिर भी
हाथ थामे
हौसलों का
बस यूँ ही चलता हूँ मैं.
दिखी थी कभी
एक उम्मीद की किरण
जिसने किया प्रेरित
मुझे आगे बढ़ने का
और मैं
उसी उम्मीद की
किरण के सहारे
चला जा रहा हूँ
अपनी मंजिल की तलाश में
–> गोपाल के.
ये तन्हाई
ये बेचैनी
और साथ देने को
बस पुरानी यादें
दिल पर बस चलता है
और न ही दिमाग पर
बस चलता है तो यादो पर
जो तडपती हैं आकर..
मै तो नहीं बुलाता
इन यादों को अपने पास
फिर क्यूँ आ जाती हैं ये
देख कर मुझे उदास?
शायद ये तनहा देख कर मुझे
साथ देने आ जाती हैं
हाँ, ये बेवफा नहीं हैं
तुम्हारी तरह
झूठी नहीं हैं
तुम्हारे वादों की तरह
टूटती नहीं हैं
तुम्हारी कसमो की तरह
सिर्फ इन्हें थोडा सा
वक़्त ही तो चाहिए
नहीं चाहती धन दौलत
और न तन्हाई
ये तो कही भी आ सकती हैं
कहीं भी जा सकती हैं
बिना किसी रोक टोक के
और बिना किसी के इज़ाज़त के..
क्यूंकि ये किसी को तनहा नहीं देख सकती..
यादें हैं न..!
इन्हें किसी ने बेवफाई नहीं सिखाई
तभी ये बावफा हैं
और हमसफ़र हैं
हमारी जिंदगी की
ताउम्र .. ताजिंदगी..!!
–गोपाल के